स्पर्श हिमालय महोत्सव – 2025 लेखक गाँव से उठी वैश्विक संस्कृति की गूंज

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स्पर्श हिमालय महोत्सव – 2025 लेखक गाँव से उठी वैश्विक संस्कृति की गूंज

रिपोर्ट : मधु खन्ना
स्थान : लेखक गाँव, थानो, देहरादून
दिनांक : 2–4 नवम्बर 2025

देवभूमि उत्तराखंड की निर्मल वादियों में आयोजित तीन दिवसीय (विशेष अंतरराष्ट्रीय सत्र सहितत्रि दिवसीय) “स्पर्श हिमालय महोत्सव – 2025” ने साहित्य, संस्कृति और वैश्विक भारतीयता की ऐसी गूंज उत्पन्न की, जिसने न केवल भारत को बल्कि विश्वभर के प्रवासी मनों को एक सूत्र में बाँध दिया। यह आयोजन पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के “लेखक गांव” के स्वप्न को साकार करने की दिशा में एक प्रखर कदम रहा, जिसका संरक्षण पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने किया।

उद्घाटन — “स्वस्थ, समृद्ध और युवा उत्तराखंड–2025” का संकल्प
महोत्सव का शुभारंभ भव्यता और सांस्कृतिक गरिमा के साथ हुआ, जिसका केंद्र बिंदु था— “स्वस्थ, समृद्ध और युवा उत्तराखंड–2025”। आयुर्वेद, योग, नवाचार, स्वच्छता और शिक्षा को सम्मिलित करते हुए राज्य के संतुलित विकास का यह संकल्प सभी के मन में नई ऊर्जा भर गया।

धन्वंतरि प्रतिमा का अनावरण — आरोग्य व संस्कृति का संगम
पहले दिन का मुख्य आकर्षण रहा भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा का अनावरण, जिसे मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति माननीय श्री पृथ्वीराज सिंह रूपन तथा केंद्रीय मंत्री श्री किरेन रीजीजू ने किया। यह क्षण भारतीय चिकित्सा परंपरा, आयुर्वेद और योग के वैश्विक महत्व का प्रतीक बनकर उभरा।

मुख्य अतिथियों के उद्बोधन — हिमालय का गौरव
केंद्रीय मंत्री श्री किरेन रीजीजू ने अपने उद्बोधन में कहा— “हिमालय केवल पर्वत नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक शक्ति और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र है।”
उन्होंने भारत की एकता के प्रति विश्व की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए संस्कृति की भूमिका को भारत की दृढ़ता और अखंडता का आधार बताया।
डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने बताया कि लेखक गांव को सृजन, संस्कृति और शिक्षा का केंद्र बनाना ही इस महोत्सव की आत्मा है—जहाँ शब्द संस्कारों का निर्माण करें और रचनात्मकता जीवन में प्रवाहित हो।

उद्घाटन सत्र में विशिष्ट उपस्थिति
मंच पर अनेक प्रतिष्ठित हस्तियाँ उपस्थित रहीं—
जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज
आचार्य बालकृष्ण (पतंजलि योगपीठ)
माननीय श्री रूपन (मॉरीशस)
प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे
प्रो. सोमवीर (इंडोनेशिया)
पद्मभूषण डॉ. अनिल जोशी
पद्मश्री कैलाश खेर
डॉ. आरुषि निशंक, विदुषी निशंक
और 65 देशों से आए प्रतिनिधि, जिन्होंने इस महोत्सव को वैश्विक स्वरूप प्रदान किया।

लेखक गाँव में आत्मीयता और सेवा भाव
तीनों दिनों में लेखक गाँव प्रशासन व कार्यकर्ताओं ने अतिथि–सत्कार की परंपरा को “अतिथि देवो भव” की सजीव अभिव्यक्ति बनाया। भोजन, आवागमन, व्यवस्थाएँ—हर स्तर पर सूक्ष्मता और आत्मीयता देखी गई। डॉ. सुशील उपाध्याय, डॉ. वेद प्रकाश, डॉ. नीरज, डॉ. मेनका त्रिपाठी सहित सभी विद्वानों का विनम्र व्यवहार साहित्यिक संस्कारों की सजीव मिसाल रहा।
समापन सत्र में पद्मश्री कैलाश खेर के भजन व संगीत ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

चतुर्थ दिवस : वैश्विक सहभागिता का दिव्य समागम
(विशेष अंतरराष्ट्रीय सत्र)
4 नवम्बर 2025 को आयोजित विशेष दिवस ने महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय ऊँचाई प्रदान की।
सुबह विदेशी अतिथियों का पारंपरिक लोकस्वागत हुआ। ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, तजाकिस्तान, बेल्जियम, जापान, मॉरीशस सहित अनेक देशों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने समारोह को बहुराष्ट्रीय संवाद का स्वरूप दिया।
परम पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने कहा— “यह महोत्सव मात्र आयोजन नहीं, एक साधना है—जो सेवा, संस्कृति और सृजन को जोड़ता है।”

कला पंडाल और नरसिंह मंदिर की छटा
पद्मभूषण कलाकार जतिन दास की उपस्थिति ने कला को नया आयाम दिया। दोपहर में नरसिंह मंदिर के दर्शन और प्रार्थना में विदेशी अतिथियों की भावपूर्ण सहभागिता ने भारतीय संस्कृति की वैश्विक आत्मीयता को उजागर किया।

नालंदा पुस्तकालय में वैचारिक सत्र
“भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण में भाषा, साहित्य और प्रवासी चेतना की भूमिका” विषय पर आयोजित सत्र का संचालन डॉ. सुशील उपाध्याय ने किया।डॉ मेनका त्रिपाठी ने इस सत्र के संचालन में मुख्य सहयोग दिया!
अध्यक्षता श्री अनिल जोशी ने की, और मुख्य अतिथि थे ऑस्ट्रेलिया के श्री चार्ल्स थॉमसन।
वक्ताओं में—
डॉ. बाबूराव देसाई, डॉ. जायंटकर शर्मा, डॉ. मधु खन्ना, डॉ. अतेला, सुश्री सल्तनत रहमतुल्लाह तथा श्री जावेद खोलोव शामिल थे।
सभी ने माना कि विश्व में हिंदी तभी प्रगाढ़ होगी जब प्रवासी भारतीय अपनी भाषा पर गर्व करें।

ऑनलाइन वैश्विक सत्र — 65 देशों की सहभागिता
डॉ. विवेक मणि त्रिपाठी (चीन) के संचालन और डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना (जर्मनी) के संयोजन में आयोजित तीन घंटे के इस सत्र में दुनिया भर से 65 देशों के प्रतिनिधि जुड़े।
अध्यक्षता नीदरलैंड की प्रो. पुष्पिता अवस्थी ने कीऔर मुख्य अतिथि थीं सिंगापुर की प्रो. मृदुल कीर्ति।

विश्वभर से जुड़े वक्ताओं—
डॉ. मीरा सिंह, कविता वाचकनवि, भावना कुँअर, शालिनी वर्मा, ऋतु शर्मा, ज़रीना रहमतुल्लाह, मधु खन्ना ऋषिकेश मिश्र आदि—ने अपने देशों में हिंदी के प्रसार पर स्पष्ट विचार प्रस्तुत किए।यह सत्र वैश्विक भारतीयता का मार्मिक प्रमाण बना

राष्ट्रपति रूपन का आगमन — संस्कृति का चरम सम्मान
संध्या में मॉरीशस के महामहिम राष्ट्रपति श्री रूपन एवं उनकी धर्मपत्नी के आगमन ने पूरे परिसर को उल्लास से भर दिया। उनकी विनम्रता—सभी अतिथियों के चरण स्पर्श करना—भारतीय संस्कृति का अद्भुत उदाहरण था।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देवभूमि की आत्मा का उत्सव
शाम को नाट्य, संगीत और नृत्य की अद्भुत प्रस्तुतियों ने लेखक गाँव को दीपों से सजे स्वर्गिक दृश्य में बदल दिया। यह अनुभव साहित्य, संस्कृति और अध्यात्म के त्रिवेणी-संगम जैसा था।

लेखक गाँव एक साहित्यिक तीर्थ
नालंदा पुस्तकालय की हज़ारों पुस्तकों को देखकर संतोष हुआ कि यह स्थान अब विश्वभर के लेखकों के लिए सृजन-आवास बन चुका है। आशना कंडियाल नेगी के अनुसार, लेखक यहाँ आकर ठहर सकते हैं और प्रकृति की गोद में सृजन कर सकते हैं।

लंदन से पधारे तेजेंद्र शर्मा दो महत्वपूर्ण सत्रों में मुख्य अतिथि रहे
1. कथा साहित्य – अतीत, वर्तमान और भविष्य 2. कथेतर साहित्य – विचार और यथार्थ एक सत्र में प्रवासी साहित्यकारों और अध्यापकों को सम्मानित किया गया।
विश्वभर से आए हिंदी सेवियों से संवाद, फोटो, विचार-विनिमय—सब मिलाकर यह यात्रा वास्तव में साहित्यकारों के लिए तप, तीर्थ और साधना बन गई।समापन संस्कृति, सृजन और वैश्विक भारतीयता का यज्ञ
“स्पर्श हिमालय महोत्सव – 2025” केवल एक आयोजन नहींयह वह महायज्ञ था जिसमें साहित्य, संस्कृति और भारतीयता की लौ न केवल प्रज्वलित हुई, बल्कि विश्वभर में फैली। लेखक गाँव इस महोत्सव के साथ विचारों का केंद्र, सृजन का धाम और वैश्विक संस्कृति का सेतु बनकर उभरा है। यह यात्रा मेरे लिए भी सौभाग्य का अवसर रही एक ऐसा क्षण जहाँ शब्दों ने संस्कारों को छुआ और संस्कृति ने विश्व को जोड़ा।

लेखिका मधु खन्ना ।

 

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